जो पै चेराई रामकी करतो न लजातो।तौ तू दाम कुदाम ज्यों कर-कर न बिकातो ॥ १ ॥जपत जीह रघुनाथको नाम नहिं अलसातो।बाजीगरके सूम ज्यों खल खेह न खातो ॥ २ ॥जौ तू मन! मेरे कहे राम-नाम कमातो।सीतापति सनमुख सुखी सब ठाँव समातो ॥ ३ ॥राम सोहाते तोहिं जौ तू सबहिं सोहातो।काल करम कुल कारनी कोऊ न कोहातो ॥ ४ ॥राम-नाम अनुरागही जिय जो रतिआतो।स्वारथ-परमारथ-पथी तोहिं सब पतिआतो ॥ ५ ॥सेइ साधु सुनि समुझि कै पर-पीर पिरातो।जनम कोटिको काँदले हृद-हृदय थिरातो ॥ ६ ॥भव-मग अगम अनंत है, बिनु श्रमहि सिरातो।महिमा उलटे नामकी मुनि कियो किरातो ॥ ७ ॥अमर-अगम तनु पाइ सो जड़ जाय न जातो।होतो मंगल-मूल तू, अनुकूल बिधातो ॥ ८ ॥जो मन-प्रीति-प्रतीतिसों राम-नामहिं रातो।नसातोतुलसी रामप्रसादसों तिहुँताप ------- ॥ ९ ॥नसातो

जो पै चेराई रामकी करतो न लजातो
तुलसीदासपद · लगभग २ मिनट