भगति दुबारा संकड़ा, राई दुसवैं भाइ।मन तो मैंगल ह्वै रहयो; क्यूॅ करि सकै समाइ॥२६॥ ॥साझा करेंसहेजेंअ−अ+
स्वर्ग वास न बाछियै डारियै न नरक निवासुकबीरकवितास्वर्ग वास न बाछियै डारियै न नरक निवासुकबीर२ मिनट का पाठ