भूखन आभूखन सुवासन सों नाना भाँति,बनाय न बनाई को सदाई तमाम को।बैठबो अदालत को मिसलत मिटायबो जहाँ,जैसो होय ऐसो साज मनमाम को॥गज की सिलामती सिलामती सिपाइन की,रंग रोशनाई दोऊ चाहत मुदाम को।राजनीति राजबंशी राजन को ‘जसूराम’,एतो तो बनाय कीजै होत नीम साम को॥

भूखन आभूखन सुवासन सों नाना भाँति
जसुरामकवित्त · लगभग २ मिनट