चाबुक सवार जल तरन अरु धनूर,घात जोत ज्ञान ब्रह्म भेद कोक लहिये।गीतन संगीत नट विद्या वेद व्याकरन,अच्छर अमोल तप हूँ की गति लहिये॥एती बात सुरता सों चतुर सों वाहि भाँति,बाहन कौ फैर-फैर बेगे गुन गहिये।‘जसू’ मीन सूरत में हंस के कुमार जैसे,कहे राजहंस के कुमार ऐसे कहिये॥

चाबुक सवार जल तरन अरु धनूर
जसुरामकवित्त · लगभग २ मिनट