राजनीति सबही पढ़े, सब ते राखे स्नेहजसुरामकविताराजनीति सबही पढ़े, सब ते राखे स्नेह
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८ रचनाएँ

राजनीति सबही पढ़े, सब ते राखे स्नेहजसुरामकविता
रैयत सब राज़ी रहै, मेटन राउत मानजसुरामकविता
चोरी चुगली पर तिया, कोऊ काम कुकामजसुरामकविता
जो दीजै परधान पद, तो कीजे इतवारजसुरामकविता
पत्थर सो बोल कहुं डारिये न काहू परजसुरामकविता
भूखन आभूखन सुवासन सों नाना भाँतिजसुरामकविता
चाबुक सवार जल तरन अरु धनूरजसुरामकविता
केते देश केते गाम ठामजसुरामकविता