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राम मिलण के काज सखी, मेरे आरति उर में जागी री

पद · लगभग २ मिनट
राम मिलण के काज सखी, मेरे आरति उर में जागी री।तड़पत-तड़पत कल न परत है, बिरहबाण उर लागी री।निसदिन पंथ निहारूँ पिवको, पलक न पल भर लागी री।पीव-पीव मैं रटूँ रात-दिन, दूजी सुध-बुध भागी री।बिरह भुजंग मेरो डस्यो कलेजो, लहर हलाहल जागी री।मेरी आरति मेटि गोसाईं, आय मिलौ मोहि सागी री।मीरा ब्याकुल अति उकलाणी, पिया की उमंग अति लागी री।

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