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हाशिया
कविता
टूटे सुजन मनाइए, जो टूटैं सौ बार
रहीम
दोहा · लगभग २ मिनट
टूटे सुजन मनाइए, जो टूटैं सौ बार।
रहिमन फिरि-फिरि पोहिए, टूटे मुकता हार॥८३॥
॥
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ज्यों नाचति कठपूतरी, करम नचावत साथ
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तनु रहीम है कर्म-बस, मन राखो वहि ओर
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सघन कुँज अमरैआ, सीतल छाँहि
रहीम
कविता
सघन कुँज अमरैआ, सीतल छाँहि
रहीम
२ मिनट का पाठ
रहिमन जग की रीति, मैं देखा रस ऊख मैं
रहीम
कविता
रहिमन जग की रीति, मैं देखा रस ऊख मैं
रहीम
२ मिनट का पाठ
गई आगि उर लाय, आगि लैन आई जु तिय
रहीम
कविता
गई आगि उर लाय, आगि लैन आई जु तिय
रहीम
२ मिनट का पाठ