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हाशिया
कविता
असमय परे रहीम कहि, माँगिजात तजि लाज
रहीम
दोहा · लगभग २ मिनट
असमय परे रहीम कहि, माँगिजात तजि लाज।
ज्यों लछिमन माँगन गए, पाराशर के नाज॥९॥
॥
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अरज-गरज मानैं नहीं, रहिमन ये जन चारि
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आए राम रहीम सब, किए मुनिन को भेष
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रहीम
कविता
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कविता
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रहीम
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रहीम
कविता
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रहीम
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