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हाशिया
कविता
आए राम रहीम सब, किए मुनिन को भेष
रहीम
दोहा · लगभग २ मिनट
आए राम रहीम सब, किए मुनिन को भेष।
जब जापै बिपदा परै, सो जावै परदेश॥१०॥
॥
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असमय परे रहीम कहि, माँगिजात तजि लाज
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आप न काहू काम के, डार पात फल मूर
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सुठि सुकुमार तरुनिआ, सुनि पिअ गौन
रहीम
कविता
सुठि सुकुमार तरुनिआ, सुनि पिअ गौन
रहीम
२ मिनट का पाठ
इक नाहीं इक पीर, हिय रहीम होती रहै
रहीम
कविता
इक नाहीं इक पीर, हिय रहीम होती रहै
रहीम
२ मिनट का पाठ
होइ कत कारि बदरिआ, बरखत पाथ
रहीम
कविता
होइ कत कारि बदरिआ, बरखत पाथ
रहीम
२ मिनट का पाठ