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हाशिया
कविता
इक अगी बिनु कारनहिं, इक रस सदा समान
रसखान
दोहा · लगभग २ मिनट
इक अगी बिनु कारनहिं, इक रस सदा समान।
गनै प्रियहि सर्वस्व जो, सोई प्रेम प्रमान॥
॥
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