और ए व्यौहार बिषै बिंब प्रतिबिंब जे हैं,ते तो नीकै जानै जात देखियै प्रतछ है।जैसे तो प्रतछ नाँहि चेतन अबिद्या दोऊ,बिंब प्रतिबिंब तौ ए कैसै ठहरत है।सो तौ यह जीवपनौ मन मैं न आवै क्यौं हूँ,बिना मन आऐ कैसैं जात एक संदेह है।बिनती करत नाथ कृपाल है दयासिंधु,अपनौ समुझि मोसौं मया करिकै कहैं॥

और ए व्यौहार बिषै बिंब प्रतिबिंब जे हैं
जसवंत सिंहकवित्त · लगभग २ मिनट