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काँची कारी जिनि करै, दिन दिन बधै बियाधि

साखी · लगभग २ मिनट
काँची कारी जिनि करै, दिन दिन बधै बियाधि।राम कबीरे रुचि गई, याही ओषदि साधि॥४०॥

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