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कहत सुनत जग जात है, विषै न सूजो काल

साखी · लगभग २ मिनट
कहत सुनत जग जात है, विषै न सूजो काल।कबीर प्यालै प्रेम कै, भरि भरि पिवै रसाल॥४९॥

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