तौ लगि जिनि मारै तूँ मोहिं।जौं लगि मैं देखूँ नहिं तोहिं॥इब के बिछुरे मिलन कैसे होई।इहि बिधि बहुरि न चीन्है कोई॥दीनदयाल दया करि जोई।सब सुख आनंद तुम थैं होई॥जनम-जनम के बंधन खोई।देखण दादू अहि निसि रोई॥ ॥साझा करेंसहेजेंअ−अ+
सहज सुन्नि मन राखिये, इन दून्यूँ के माहिंदादू दयालकवितासहज सुन्नि मन राखिये, इन दून्यूँ के माहिंदादू दयाल२ मिनट का पाठ
सतगुर माला मन दिया, पवन सुरति सूँ पोइदादू दयालकवितासतगुर माला मन दिया, पवन सुरति सूँ पोइदादू दयाल२ मिनट का पाठ
रँग भरि खेलौं पिउ सौं, तहँ बाजै बेन रसालदादू दयालकवितारँग भरि खेलौं पिउ सौं, तहँ बाजै बेन रसालदादू दयाल२ मिनट का पाठ