कौन तो पूत पिता को काकौ। कौन मेरे को देइ संतापौ।हरि ठग जग कौ ठगौरी लाई। हरि के बियोग कैसे जियों मेरी माई॥कौन को पुरुष कौन को नारी। या तत लेहु सरीर बिचारी॥कहि कबीर ठग स्यों मन मान्या। गई ठगौरी ठग पहिचान्या॥51॥ ॥साझा करेंसहेजेंअ−अ+
सासु की दुखी ससुर की प्यारी जेठ के नाम डरौं रेकबीरकवितासासु की दुखी ससुर की प्यारी जेठ के नाम डरौं रेकबीर२ मिनट का पाठ
सुरति सिमृति दुई कन्नी मंदा परमिति बाहर खिंथाकबीरकवितासुरति सिमृति दुई कन्नी मंदा परमिति बाहर खिंथाकबीर२ मिनट का पाठ