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हाशिया
कविता
पावस नृप चढि आइयौ, साजि कटक मम गेह
सुंदरदास
दोहा · लगभग २ मिनट
पावस नृप चढि आइयौ, साजि कटक मम गेह।
सुन्दर बिरहनि थरसली, कंपि उठी सब देह॥
॥
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जलचर थलचर ब्योमचर, गनै कहाँ लौ कोइ
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सुन्दर यहु मन चोरटा, नाषै ताला तोरि
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तैं दिन च्यारि बिराम लियौ
सुंदरदास
कविता
तैं दिन च्यारि बिराम लियौ
सुंदरदास
२ मिनट का पाठ
जौ खपरा कर लै घर डोलत
सुंदरदास
कविता
जौ खपरा कर लै घर डोलत
सुंदरदास
२ मिनट का पाठ
भई हौं अति बावरी बिरह घेरी बावरी
सुंदरदास
कविता
भई हौं अति बावरी बिरह घेरी बावरी
सुंदरदास
२ मिनट का पाठ