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भल ऊठी भोली जली, खपरा फूटिम फूटि

साखी · लगभग २ मिनट
भल ऊठी भोली जली, खपरा फूटिम फूटि ।ओगी था सो रमि गया, आसणि रही विभूति ॥४॥

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