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कबीर दिल स्यावति भया, पाया फल संम्रथ्य

साखी · लगभग २ मिनट
कबीर दिल स्यावति भया, पाया फल संम्रथ्य।सायर मांहि ढंढोलतां, हीरै पडि गया हथ्य॥३४॥

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