कबीर दिल स्यावति भया, पाया फल संम्रथ्य।सायर मांहि ढंढोलतां, हीरै पडि गया हथ्य॥३४॥ ॥साझा करेंसहेजेंअ−अ+
हिंदू तुरक कहाँ ते आये किन एह राह चलाईकबीरकविताहिंदू तुरक कहाँ ते आये किन एह राह चलाईकबीर२ मिनट का पाठ
सासु की दुखी ससुर की प्यारी जेठ के नाम डरौं रेकबीरकवितासासु की दुखी ससुर की प्यारी जेठ के नाम डरौं रेकबीर२ मिनट का पाठ