कँपि-कँपि उठति कुमोदिनी, छिन-छिन दिनहिं विशाल।उदति कलानिधि होन गुनि, कारण कवन जमाल॥ ॥साझा करेंसहेजेंअ−अ+
निपट निकट निसि मुख निरखि, नलिनी नयन री आजजमालकवितानिपट निकट निसि मुख निरखि, नलिनी नयन री आजजमाल२ मिनट का पाठ