बिनहिं मेघ गरजत कभूँ, कभूँ बरसत तिहिं ठौर।कभूँ चमँकति चित चकित करि, कह जमाल कर गौर॥ ॥साझा करेंसहेजेंअ−अ+
जित-जित विकसित कंज कलि, तित-तित फिर नँदलालजमालकविताजित-जित विकसित कंज कलि, तित-तित फिर नँदलालजमाल२ मिनट का पाठ
नैन किलकिला पंख पल, थिरकि तरुणि तन ताल!जमालकवितानैन किलकिला पंख पल, थिरकि तरुणि तन ताल!जमाल२ मिनट का पाठ
त्रिपुर अटाँ चढ़ि चाह भरि, बीन बजावति बालजमालकवितात्रिपुर अटाँ चढ़ि चाह भरि, बीन बजावति बालजमाल२ मिनट का पाठ