निबरक सुत ल्यौ कोरा, राम मोहि मारि, कलि बिष बोरा॥ टेक॥उन देस जाइबा रे बाबू, देखिबो रे लोग किन किन खैबू लो।उड़ि कागा रे उन देस जाइबा, जासूँ मेरा मन चित लागा लो।हाट ढूँढि ले, पटनपुर ढूँढि ले, नहीं गाँव कै गोरा लो।जल बिन हंस निसह बिन रबू कबीर का स्वांमी पाइ परिकै मनैबू लो॥376॥

