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अब सुनि मेरे मन आवत है सोई कहौं

कवित्त · लगभग २ मिनट
अब सुनि मेरे मन आवत है सोई कहौं,जामैं निसंदेह ब्रह्मतत्व कौ प्रकास है।देह तौ बिचारे तैं आभास ही पै लागत है,तैसैं ही बिचारि यामैं ग्यान कौ आभास है।लगायो है खिरकी मैं पारै बिना काच जैसैं,तामैं जैसैं बाहर कौ भीतर विलास है।ऐसै प्रतिबिंब मान्यौ आबरन जान्यौ गयौ,तैसैं ही सरीर विषैं ग्यान कौ निवास है॥

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