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गोपाल तेरा आरता

सबद · लगभग २ मिनट
गोपाल तेरा आरता।जो जन तुमरी भगति करने, तिनके कांज सँवारता॥ रहाउ॥दालि सीधा माँगउ घीउ, हमरा षुसी करैं नित जीउ।पन्ही आछादनु नीका, अनाज मंगउ सतसीका॥गऊ भैंस माँगउ लावेरी, इक ताजनि तुरी चंगेरी।घर की गीहनि चंगी, जनु धना लेवै भंगी॥

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