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कहु रहीम उत जायकै, गिरिधारी सों टेरि

दोहा · लगभग २ मिनट
कहु रहीम उत जायकै, गिरिधारी सों टेरि।राधे दृग-जल-झरन ते, अब ब्रज बूड़त फेरि॥२९॥

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