स्वासहु तुरिय जो उच्चरै, तिय है निहचल चित्त।पूत परा घर जानिए, रहिमन तीनि पवित्त॥२४६॥ ॥साझा करेंसहेजेंअ−अ+
पलटि चली मुसकाइ, द्युति रहीम उपजाइ अतिरहीमकवितापलटि चली मुसकाइ, द्युति रहीम उपजाइ अतिरहीम२ मिनट का पाठ