राम कहत चलु, राम कहत चलु, राम कहत चलु भाई रे।नाहिं तौ भव-बेगारि महँ परिहै, छूटत अति कठिनाई रे ॥ १ ॥बाँस पुरान साज-सब अठकठ, सरल तिकोन खटोला रे।हमहिं दिहल करि कुटिल करमचँद मंद मोल बिनु डोला रे ॥ २ ॥बिषम कहार मार-मद-माते चलहिं न पाउँ बटोरा रे।मंद बिलंद अभेरा दलकन पाइय दुख झकझौरा रे ॥ ३ ॥काँट कुराय लपेटन लोटन ठावहिं ठाउँ बझाऊ रे।जस जस चलिय दूरि तस तस निज बास न भेंट लगाऊ रे ॥ ४ ॥मारग अगम, संग नहिं संबल, नाउँ गाउँकर भूला रे।तुलसिदास भव त्रास हरहु अब , होहु राम अनुकूला रे ॥ ५ ॥

राम कहत चलु, राम कहत चलु, राम कहत चलु भाई रे
तुलसीदासपद · लगभग २ मिनट