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जो पाथर को कहिते देव

पद · लगभग २ मिनट
जो पाथर को कहिते देव। ताकी बिरथा होवै सेव॥जो पाथर की पांई पाई। तिस की घाल अजाई जाई॥ठाकुर हमरा सद बोलंता। सबै जिया को प्रभ दान देता॥अंतर देव न जानै अंधु। भ्रम को मोह्या पावै फंधु॥न पाथर बोलै ना किछु देइ। फोकट कर्म निहफल है सेइ॥जे मिरतक के चंदन चढ़ावै। उससे कहहु कौन फल पावैं॥जो मिरतक को विष्टा मांहिं सुलाई। तो मिरतक का क्या घटि जाई॥कहत कबीर हौ करहुँ पुकार। समझ देखु साकत गावार॥दूजै भाइ बहुत घर घाले। राम भगत है सदा सुखाले॥98॥

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