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झूठे तन कौ कहा रखइये, मरिये तौ पल भरि रहण न पइये

पद · लगभग २ मिनट
झूठे तन कौ कहा रखइये, मरिये तौ पल भरि रहण न पइये॥ टेक॥षीर षाँढ़ घृत प्यंउ सँवारा, प्राँन गये ले बाहरि जारा॥चोवा चंदन चरनत अंगा, सो तन जरै काठ के संगा॥दास कबीर यहु कीन्ह बिचारा, इक दिन ह्नैहै हाल हमारा॥93॥

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