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हाशिया
कविता
सुन्दर आज्ञा मैं रहे, काल कर्म जमदूत
सुंदरदास
दोहा · लगभग २ मिनट
सुन्दर आज्ञा मैं रहे, काल कर्म जमदूत।
गण गंधर्व निशाचरा, और जहाँ लगि भूत॥
॥
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सुन्दर सूकै हाड़ कौं, स्वान चचोरै आइ
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सुन्दर जागे भाग सिर, सद्गुरु भये दयाल
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