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मोहजनित मल लाग बिबिध बिधि कोटिहु जतन न जाई

पद · लगभग २ मिनट
मोहजनित मल लाग बिबिध बिधि कोटिहु जतन न जाई।जनम जनम अभ्यास-निरत चित, अधिक अधिक लपटाई ॥ १ ॥नयन मलिन परनारि निरखि, मन मलिन बिषय सँग लागे।हृदय मलिन बासना-मान मद, जीव सहज सुख त्यागे ॥ २ ॥परनिंदा सुनि श्रवन मलिन भे, बचन दोष पर गाये।सब प्रकार मलभार लाग निज नाथ-चरन बिसराये ॥ ३ ॥तुलसिदास ब्रत-दान, ग्यान-तप, सुद्धिहेतु श्रुति गावै।राम-चरन-अनुराग-नीर बिनु मल अति नास न पावै ॥ ४ ॥

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