अब मोहि राम भरोसा तेरा,जाके राम सरीखा साहिब भाई, सों क्यूँ अनत पुकारन जाई॥जा सिरि तीनि लोक कौ भारा, सो क्यूँ न करै जन को प्रतिपारा॥कहै कबीर सेवौ बनवारी, सींची पेड़ पीवै सब डारी॥114॥ ॥साझा करेंसहेजेंअ−अ+
हिंदू तुरक कहाँ ते आये किन एह राह चलाईकबीरकविताहिंदू तुरक कहाँ ते आये किन एह राह चलाईकबीर२ मिनट का पाठ