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अपने विचारि असवारी कीजै, सहज के पाइड़े पाव जब दीजे

पद · लगभग २ मिनट
अपने विचारि असवारी कीजै, सहज के पाइड़े पाव जब दीजे॥ टेक॥दै मुहरा लगाँम पहिराँऊँ, सिकली जीन गगन दौराऊँ।चलि बैकुंठ तोहि लै तारों, थकहि त प्रेम ताजनैं मारूँ॥जन कबीर ऐसा असवारा, बेद कतेब दहूँ थैं न्यारा॥25॥

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