मेरी सूचीपढ़ना शुरू करें

कबीर सुपनै रैनि कै, उघड़ि आए नैन

साखी · लगभग २ मिनट
कबीर सुपनै रैनि कै, उघड़ि आए नैन।जीव पड्या बहु लूटि मैं, जागै तो लैंण नदैण॥२२॥

अब कुछ और पढ़ें