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हाशिया
कविता
हाकी बाकी रहि गई, नां कछु पिवै न खाइ
सुंदरदास
दोहा · लगभग २ मिनट
हाकी बाकी रहि गई, नां कछु पिवै न खाइ।
सुन्दर बिरहनि वह सही, चित्र लिखी रहि जाइ॥
॥
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