मेरी सूचीपढ़ना शुरू करें

अलह अलख निरंजन देव, किहि बिधि करौं तुम्हारी सेव

पद · लगभग २ मिनट
अलह अलख निरंजन देव, किहि बिधि करौं तुम्हारी सेव॥ टेक॥विश्न सोई जाको विस्तार, सोई कृस्न जिनि कीयौ संसार।गोब्यंद ते ब्रह्मंडहि नहै, सोई राम जे जुगि जुगि रहै॥अलह सोई जिनि उमति उपाई, दस दर खोलै सोई खुदाई।लख चौरासी रब परवरै, सोई करीब जे एती करै।गोरख सोई ग्यांन गमि गहे, महादेव सोई मन को लहै॥सिध सोई जो साधै इति, नाय सोई जो त्रिभवन जती।सिध साधू पैकंबर हूवा, जपै सू एक भेष है जूवा।अपरंपार की नांउ अनंत, कहै कबीर सोई भगवंत॥327॥

अब कुछ और पढ़ें