प्यारु बतावै सबै जग के निजुकुलपति मिश्रकविताप्यारु बतावै सबै जग के निजु
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कुलपति मिश्र · चयनित काव्य से इस डिजिटल संकलन में उपलब्ध रचनाएँ। सूची को मूल पुस्तक की संपूर्ण विषय-सूची न मानें।
८ रचनाएँ

प्यारु बतावै सबै जग के निजुकुलपति मिश्रकविता
ऐसिय कुंज बनी छबिपुंजकुलपति मिश्रकविता
देह धरौ परकाजहि कौं जगकुलपति मिश्रकविता
लोचन लजौहैं सोहैं होत न सखीन हू सोकुलपति मिश्रकविता
हूँ वे मुश्ताक़ तेरी सूरत का नूर देखकुलपति मिश्रकविता
उज्जल सिंगारु सोहै फूलनि को हारु अरुकुलपति मिश्रकविता
किधौं काहू अदभुत चंद के चकोर भयेकुलपति मिश्रकविता
मेरी चित चाह तें मिटो है उरदाह पियकुलपति मिश्रकविता