प्रहलाद पठाये पठन साल। संगि सखा बहु लिए बाल॥मोकौ कहा पढ़ावसि आल जाल। मेरी पटिया लिखि देहु श्रीगोपाल॥नहीं छोड़ौ रे बाबा राम नाम। मेरो और पढ़न स्यो नहीं काम॥संडै मरकै कह्यौ जाइ। प्रहलाद बुलाये बेगि धाइ॥तू राम कहन की छोडु बानि। तुझ तुरत छड़ाऊँ मेरो कह्यो मानि॥मोकौ कहा सतावहु बार बार। प्रभु भज थल गिर किये पहार॥इक राम न छोड़ौ गुरुहि गारि। मोकौ घालि जारि भाखै मारि डांरि॥काढ़ि खड्ग कोप्यो रिसाइ। तुझ राखनहारो मोहि बताइ॥प्रभु थंभ ते निकसे कै बिस्तार। हरनाखस छेद्यो नख बिदार॥ओइ परम पुरुष देवाधिदेव। भगत हेत नरसिंघ भेव॥कहि कबीर का लखै न पार। प्रहलाद उबारे अनिक बार॥141॥

प्रहलाद पठाये पठन साल
कबीरपद · लगभग २ मिनट