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सुन्दर बिरहनि अध जरी, दुःख कहै मुख रोइ

दोहा · लगभग २ मिनट
सुन्दर बिरहनि अध जरी, दुःख कहै मुख रोइ।जरि बरि कै भस्मी भई, धुंवा न निकसै कोइ॥

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