सुन्दर भूल्या क्यौं फिरै, सांई है तुझ मांहिं।एक मेक ह्वै मिलि रह्या, दूजा कोई नांहिं॥ ॥साझा करेंसहेजेंअ−अ+
झूठौ जग एन सुन नित्य गुरु बैन देषेसुंदरदासकविताझूठौ जग एन सुन नित्य गुरु बैन देषेसुंदरदास२ मिनट का पाठ