मुख्य पाठ पर जाएँ
लेखक, शीर्षक, विधा, संग्रह या पाठ खोजें
Roman में लिखें, हिंदी सुझाव चुनें।
मेरी सूची
पढ़ना शुरू करें
लेखक, शीर्षक, विधा, संग्रह या पाठ खोजें
Roman में लिखें, हिंदी सुझाव चुनें।
खोजें और पढ़ें
कहानियाँ
कविताएँ
उपन्यास
निबंध
रस से पढ़ें
लेखक
संग्रह
हाशिया
कविता
सुन्दर बिरहनि अध जरी, दुःख कहै मुख रोइ
सुंदरदास
दोहा · लगभग २ मिनट
सुन्दर बिरहनि अध जरी, दुःख कहै मुख रोइ।
जरि बरि कै भस्मी भई, धुंवा न निकसै कोइ॥
॥
साझा करें
सहेजें
अ−
अ+
पिछला
सुन्दर तृष्णा कारनै, जाइ समुद्र हि बीच
अगला
सुन्दर भूल्या क्यौं फिरै, सांई है तुझ मांहिं
अब कुछ और पढ़ें
आसन मारि सँवारि जटा
सुंदरदास
कविता
आसन मारि सँवारि जटा
सुंदरदास
२ मिनट का पाठ
तैं दिन च्यारि बिराम लियौ
सुंदरदास
कविता
तैं दिन च्यारि बिराम लियौ
सुंदरदास
२ मिनट का पाठ
पेट तें बाहिर होतहि बालक
सुंदरदास
कविता
पेट तें बाहिर होतहि बालक
सुंदरदास
२ मिनट का पाठ