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हाशिया
कविता
भेष बनावै बहुत बिधि, जटा बधावै सीस
सुंदरदास
दोहा · लगभग २ मिनट
भेष बनावै बहुत बिधि, जटा बधावै सीस।
माला पहिरै तिलक दे, सुंदर तजै न रीस॥
॥
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सुन्दर सूरातन किये, जगत मांहिं जस होइ
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जौ प्रभु कौं प्यारौ लगै, सोई प्यारौ मोहि
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पेट तें बाहिर होतहि बालक
सुंदरदास
कविता
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सुंदरदास
कविता
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सुंदरदास
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सुंदरदास
कविता
कोउ बिभूति जटा नख धारि
सुंदरदास
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