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दुख नर सुनि हाँसी करैं, धरैं रहीम न धीर

दोहा · लगभग २ मिनट
दुख नर सुनि हाँसी करैं, धरैं रहीम न धीर।कही सुनैं सुनि-सुनि करैं, ऐसे वे रघुवीर॥९१॥

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