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तितली

उपन्यास · लगभग ४४० मिनट

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ग्रामीण जीवन, प्रेम, आत्मसम्मान और बदलते सामाजिक संबंधों के बीच तितली और मधुबन की कथा।

विषय सूची

  1. प्रथम खंड !
  2. २ — १
  3. ३ — १
  4. ४ — १
  5. ५ — १
  6. ६ — १
  7. द्वितीय खंड
  8. २ — २
  9. ३ — २
  10. १०५ — २
  11. ११६ — २
  12. १२७ — १
  13. १३८ — १
  14. १४अध्याय १४
  15. १५अध्याय १५
  16. १६तृतीय खंड
  17. १७२ — ३
  18. १८३ — ३
  19. १९४ — २
  20. २०५ — ३
  21. २१६ — ३
  22. २२७ — २
  23. २३८ — २
  24. २४दूसरा दृश्‍य, अंधकार में और भी मलिन, कलुषपूर्ण हृदय की भूमिका में अत्यंत विकृति होकर प्रतिभासित हो उठा। शेरकोट-खंडहर, उसमें भीतरी यह लिपी-पुती चूने से चमकीली एक छोटी-सी कोठरी ! और राजो बन ठनकर बैठी है। क्‍यों ? किवाड़ बंद है। भीतर ही वह शीशे में अपना रूप देख रही है। बाहर किवाड़ों पर खट-खट का शब्‍द होता है। वह मुस्कुराकर उठ खड़ी होती है।
  25. २५चतुर्थ खंड
  26. २६२ — ४
  27. २७३ — ४
  28. २८४ — ३
  29. २९५ — ४

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