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रहिमन बात अगम्य की, कहन-सुनन की नाहिं

दोहा · लगभग २ मिनट
रहिमन बात अगम्य की, कहन-सुनन की नाहिं।जो जानत सो कहत नहिं, कहत सो जानत नाहिं॥१९१॥

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