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रहिमन बिगरी आदि की, बनै न खरचे दाम

दोहा · लगभग २ मिनट
रहिमन बिगरी आदि की, बनै न खरचे दाम।हरि बाढ़े आकास लौं, तऊ बावनै नाम॥२०३॥

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