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काह कहूँ सजनी सँग की

सवैया · लगभग २ मिनट
काह कहूँ सजनी सँग की रजनी नित बीतै मुकुंद को हेरी।आवन रोज कहैं मनभावन आवन की न कबौं करी फेरी॥सौतिन भाग बढ्यौ ब्रज में जिन लूटत हैं निसि रंग घनेरी।मो रसखानि लिखी बिधना मन मारिकै आपु बनी हौं अहेरी।।

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