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माधौ सो मिलै जासौं मिलि रहिये, ता कारनि बक बहु दुख सहिये

पद · लगभग २ मिनट
माधौ सो मिलै जासौं मिलि रहिये, ता कारनि बक बहु दुख सहिये॥ टेक॥छत्राधार देखत ढहि जाइ, अधिक गरब थें खाक मिलाइ।अगम अगोचर लखीं न जाइ, जहाँ का सहज फिरि तहाँ समाइ॥कहै कबीर झूठे अभिमान, से हम सो तुम्ह एक समान॥364॥

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