नहीं छाड़ी बाबा राम नाम, मोहिं और पढ़न सूँ कौन काम॥ टेक॥प्रह्लाद पधारे पढ़न साल, संग सखा लीये बहुत बाल।मोहि कहा पढ़ाव आल जाल, मेरी पाटी मैं लिखि दे श्री गोपाल॥तब सैनां मुरकां कह्यौ जाइ, प्रहिलाद बँधायौ बेगि आइ।तूँ राम कहन की छाड़ि बांनि, बेगि छुड़ाऊँ मेरो कह्यौ मांनि॥मोहि कहा डरावै बार बार, जिनि जल थल गिर कौ कियौ प्रहार॥बाँधि मोरि भावै देह जारि, जे हूँ राम छाड़ौ तौ गुरहि गार।तब काढ़ि खड़ग कोप्यौ रिसाइ, तोहि राखनहारौ मोहि बताइ॥खंभा मैं प्रगट्यो गिलारि, हरनाकस मार्यो नख बिदारि॥महापुरुष देवाधिदेव नरस्यंध प्रकट कियौ भगति भेव।कहै कबीर कोई लहै न पार, प्रहिलाद उबार्यौ अनेक बार॥379॥

