मैं समुइयौ निरधार, यह जग काँचो काँच सौबिहारीकवितामैं समुइयौ निरधार, यह जग काँचो काँच सौबिहारी२ मिनट का पाठ
चलत पाइ निगुनी गुनी, धनु मनि-मुत्तिय-मालबिहारीकविताचलत पाइ निगुनी गुनी, धनु मनि-मुत्तिय-मालबिहारी२ मिनट का पाठ