दुख नर सुनि हाँसी करैं, धरैं रहीम न धीर।कही सुनैं सुनि-सुनि करैं, ऐसे वे रघुवीर॥९१॥ ॥साझा करेंसहेजेंअ−अ+
चूल्हा दीन्हो बारि, नातो रह्यो सो जरि गयोरहीमकविताचूल्हा दीन्हो बारि, नातो रह्यो सो जरि गयोरहीम२ मिनट का पाठ